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दार्शनिक गण

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भाग-1

पहली कहानी

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एक दिन बच्चे दीदी जी से पहले स्कूल पहुँच गए और एक दूसरे से सवाल पूछने का खेल खेलने लगे। फूलों का राजा कौन, फलों का राजा कौन, जानवरों का राजा कौन और ऐसे ही अनेक सवाल और उनके अनगिनत जवाब। इतने में दीदी जी आईं। रंग-बिरंगे कपड़ों में माथे पर गोल-सा जूड़ा बाँधे दीदी जी ऐसी लग रही थीं जैसे बहार के मौसम में फूल-परी हों। बच्चों के सवाल-जवाब सुनकर दीदी जी बड़ी खुश हुईं। मगर हमेशा सबसे ज्यादा बॊलने वाली मुन्नी कुछ नहीं बोल रही थी। दीदी जी ने पुछा तो मुन्नी ने कहाः फूलों में अगर राजा गुलाब है, तो फ़िर मंत्री और चोर कौन है ? नौकर कौन है ? मुझे तो फूलों में कोई नौकर नहीं लगता।’ यह सुन कर मुन्ना ने भी कभी कहा ‘फ़िर ये भी तो हो सकता है कि हम जिस फूल को राजा मानते हैं वह राजा नहीं कुछ और हो।’ दीदी मुस्कराते हुए हामी भरी, बात तो इनकी सही है। इस पर बच्चॊं ने पूछा, दीदी जी आप बताइए।