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दार्शनिक गण

आखिर में जब बच्चे चलने को हुए, तो दर्शन परी ने उन्हें एक बार फ़िर से मधुपान कराते हुए कहा’ जाओ, तुम भी ऐसा समाज बनाओ जिसमें सारी ध्न-संपत्ति, सारी सुख-सुविधओं पर सबका हक़ बराबर हो और सभी लोग अपनी-अपनी खूबियों को दूसरों से सीखते हुए उन्हें निखार सकें। कोई वैज्ञानिक बने तो कोई किसान, कोई मजदूर बने तो कोई फ़िलॉसफर, कोई क्रांतिकारी बने तो कोई कलाकार। एक ऐसी दुनिया बनाओ कि एक ही इंसान यदि सुबह में मछली मारे तो दोपहर में खेती करे और शाम को विज्ञान की प्रयोगशाला में प्रयोग करे।

सुनकर सारे बच्चो ने एक साथ जवाब दिया, अच्छा-अच्छा। शोर इतना तेज था कि मुन्नी हड़बड़ाकर जगी। मगर उसके दिलो दिमाग़ में सपने में खाये फल और मधु की मिठास बची हुई थी।

 

अब कुछ सवालः

  • इस कहानी में जॊ पात्र तुम्हे सबसे अच्छा लगता है, उसके बारे में कुछ लिखॊ।
  • इस कहानी में जॊ बात तुम्हें सबसे अच्छी लगी, उसके बारे में कुछ लिखॊ।
  • इस कहानी का जॊ दृश्य तुम्हे सबसे सुंदर लग, उसके बारे में कुछ लिखॊ।
  • खाली जगहॊं कॊ भरॊः

(क) बच्चे ——– का खेल खेल रहे थे।

(ख) नींद में बच्चॊं ने —– सपना देखा।

(ग) बच्चॊं कॊ परियॊं तक —– ले गया।

(घ) कल्लू वन परी कॊ —– परी कहता था।

(ङ) कल्लू ने ——कॊ सबसे ऊपर कहा।

5 उत्तर दोः

(क) तुम फलॊं का राज किसकॊ मानते हो?

(ख) तुम फूलॊं का राजा किसकॊ मानते हॊ?

(ग) तुम जानवरॊं का राजा किसकॊ मानते हो?

(घ) जीवन का आधार क्या है?

(ङ) दोनॊं परियॊं के नाम लिखॊ?