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जब से अल्लाह के बंदॊं के बीच छिड़ी है जंग,

जब से अल्लाह के बंदॊं के बीच छिड़ी है जंग,
तब से खुदा के नूर का उतरता जा रहा है रंग।

कहीं शिया-सुन्नी भिड़ॆ हैं, कहीं अहमदिया मरे हैं,
और हर जगह बहाबी सबके विरूद्ध अड़ॆ-लड़ॆ हैं,
इनकी मारकाट कॊ देख फ़रिश्ते भी हैं दग।
जब से अल्लाह के बंदॊं के बीच छिड़ी है ज़ंग,
तब से खुदा के नूर का उतरता जा रहा है रंग।

उम्मा राज ला रहा कॊई खिलाफ़त मचा रहा,
सुन्नत में लगा है कॊई शरीयत ही लगा रहा,
इन सब के कुँए में ही पड़ी है जहरीली भंग
जब से अल्लाह के बंदॊं के बीच छिड़ी है ज़ंग,
तब से खुदा के नूर का उतरता जा रहा है रंग।

सारे जग कॊ मुसलमान बनाने में ये लगे हुए,
जो काम अल्लाह ने ना किया उसी में पगे हुए,
इनके अनाचार से शैतान कॊ मिला सत्संग,
जब से अल्लाह के बंदॊं के बीच छिड़ी है ज़ंग,
तब से खुदा के नूर का उतरता जा रहा है रंग।

सारी दुनिया के मालिक का राज छॊटा हो रहा,
उसकी नज़र में मज़हब का सिक्का खोटा हो रहा,
ऐसे मज़हबी लोगॊं बेहतर उसे काफ़िर मलंग,
जब से अल्लाह के बंदॊं के बीच छिड़ी है ज़ंग,
तब से खुदा के नूर का उतरता जा रहा है रंग।

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