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तुम्हारा ये कहना सही है

तुम्हारा ये कहना सही है
कि अपने जीवन पर तेरा बस नहीं रहा
मगर ये कहना ठीक नही,
कि तॊ अब कुछ भी नहीं हो सकता।

जीवन अपना हो या पराया,
सब कॊ चाहिए धन का सहारा,
मन की साध पूरी करने से पहले इस ठाम,
सबकॊ करने पड़ते हैं सब कॊ ही दूसरे काम,
किसी कॊ कम, किसी कॊ ज्यादा,
किसी को पूरा किसी कॊ आधा,
तुम्हारे साथ भी हुआ ठीक यही है,
सॊ ये कहना ठीक नहीं है,
कि अब कुछ भी नहीं हॊ सकता।

अब रॊटी, कपड़ा, मकान है तेरे पास,
अब जॊ कुछ भी आता है तुझे रास,
उसे करने की भरपूर कोशिश करॊ
उसे करके अपने जीवन में नूर भरॊ,
अपने मन से अपने साथी चुनॊ,
अपने मन से अपने सपने बुनॊ,
बदल जायेगी वो दुनिया जॊ रही है।
इस लिए ये कहना ठीक नहीं है,
अब कुछ भी नहीं हो सकता।

पिता की छाया से जैसे बाहर आई,
पति की माया से भी बाहर आऒ बाई
बेटॆ की दाया से भी बाहर आऒ माई,
फ़िर तुम किसी की न रहोगी पराई,
अपने मन से पढ़ॊ,अपने मन से बढ़ॊ,
अपने मन की सुनॊ अपने मन से जीऒ,
वैसे भी ये दुनिया तुमसे बनी है,
अतः ये कहना ठीक नहीं है,
कि अब कुछ नहीं हो सकता।

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