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अरे, रोको,रोको इस सत्ता के हाथ

अरे, रोको,रोको इस सत्ता के हाथ,
जॊ न रोक सको तो काट दो।

ये हरियाली का हनन करने आये,
हमारे जल में ज़हर भरने आये
अरे रोको इस सत्ता की सब बात,
जॊ न रोक सकॊ तॊ काट दो।

ये हवा में दूषन फैलाने वाले,
इस धरती का खून बहाने वाले,
अरे, रोको, इस सत्ता के घात,
जो न रोक सकॊ तॊ काट दो।

हमारी नदियॊं को रोकते जाते,
ये परबतॊं को ये खोदते जाते,
रोको रोको इस सत्ता के मात,
जॊ न रोक सकॊ तो काट दो।

इन्हॊंने बचपन कॊ अपह्रित किया,
हमारे यौवन कॊ बलात्कृत किया,
धरती नष्ट करता ये सत्ता विराट,
इसे छांट दो, इसे काट दो।

ये देशी विदेशी तस्कर दलाल,
इनके रहते न बचेंगे राधा गोपाल,
जो न रूक सकें ये सत्ता सम्राट,
इन्हें मार दो, इन्हें काट दो।

इन्हॊंने हमारे गाँवॊं को उजाड़ा है,
हमको अपनी जड़ॊं से उखाड़ा है,
रोको, रोको इस सत्ता के उत्पात
जो न रोक सको तो उसे काट दो।

इतिहास के हत्यारॊं में सबसे निर्मम,
अब तक के लुटॆरों में सबसे अधम,
जो रूक सके ये सत्ता अभिजात,
इसे काट दो, इसे काट दो।

ज़िंदगी में कॊई न कॊई कमी रहे,
आखॊं में कुछ न कुछ नमी रहे।
ज़रूरी नहीं कि सारे सुख हमारे हों,
दूसरे घरॊं में भी खुशहाली बनी रहे।
ठीक नहीं कि हमीं सबसे आगे रहें सदा,
दौड़ ए ज़िंदगी पर सबकी पकड़ घनी रहे।
धरती सबकी है तो अंबर भी सबका रहे,
सबके सिर पर आराम की छतरी तनी रहे।

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