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ईश्वर अल्लाह तेरे जहां में इतनी नफ़रत जंग है क्यॊ?

ईश्वर अल्लाह तेरे जहां में इतनी नफ़रत जंग है क्यॊ?
इंसान का दिल इतना बड़ा है, तेरा दिल यूँ तंग है क्यूँ।
इस ध्रती पर हम सब रहते,
मिल जुल कर सुख दुख सहते,
तू तॊ ज़न्नत स्वर्ग का वासी, तू भला ऐसे अपंग है क्यूँ
हर रंग के हम सारे लोग’
एक दूसरे से करें सहयॊग,
तुम दोनॊं के बीच का रिश्ता, पर इस कदर बदरंग है क्यूँ
हम एक दूजे के आते काम,
ये और बात है हम लेते दाम,
पर तेरे सब संतॊं दूतॊं के बीच मची हुई ये जंग है क्यूँ।
हम जब भी लड़ते दो चार ही मरते,
औतार पयंबर के लड़ते,लाख हज़ार मरते,
तुम अदोनॊं के दिल में बॊलॊ, खून खराबा संग है क्यूँ?

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