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जब सब कुछ कर दिया है तूने, धन धर्म के नाम पे

जब सब कुछ कर दिया है तूने, धन धर्म के नाम पे,
धोखा देते क्यूँ इंसां कॊ भाग्य, कर्म के नाम पे।

रजत चम्मच ओ स्वर्ण कलम संग जिसका हुआ जनम,
उसका होगा ही सुंदर, ताकतवर तन ऒ सुशील मन,
जब कर दी हर चीज़ तूने जाति -ज़ुर्म के नाम पे,
धोखा देते क्यूँ इंसां कॊ भाग्य, कर्म के नाम पे।

सदियॊं संचित संस्कार जिसमें बल, विद्या-बुद्धि,
रहेगा ही आगे उससे जिसका जन्म ही अशुद्धि,
जब कर दी हर बात तूने संस्कृति मर्म के नाम पे,
धोखा देते क्यूँ इंसां कॊ भाग्य, कर्म के नाम पे।

भाग्य मानें जब सबके जन्मना भाग बराबर हॊं
कर्म तब मानें जब सबके दिल की आग बराबर हॊ
जब कर दी हर शै तूने निठल्ले बेशर्म के नाम पे,
धोखा देते क्यूँ इंसां कॊ भाग्य, कर्म के नाम पे।

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