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ईश्वर अल्लाह तेरे जहाँ में इतनी भूख बीमारी क्यूँ है

ईश्वर अल्लाह तेरे जहाँ में इतनी भूख बीमारी क्यूँ है,
इतनी हरी भरी धरती पर तेरा वरदान यूँ भारी क्यूँ है।

क्या जाड़ा गरमी क्या बरसात सर पे छत कॊ तरसे जनता सारी,
तेरे मंदिर मस्ज़िद सब संगमरमरी महल अटारी क्यूँ हैं।

जन गण तो ऐसे अधनंगे – बुच्चे, फटॆहाल और मलीन, अनाड़ी,
तेरे मंदिर मस्ज़िद में मखमल, रेशम की भरमारी क्यूँ है।

भूख से आकूल लोग सभी और प्यास से व्याकुल नर नारी,
तेरे साधक सदा षटरस व्यंजन,छप्पन भॊग आहारी क्यूँ हैं

अज्ञान से जाहिल हर इंसान, लाचार भुगतने को बेकारी,
तेरे कर्ता धर्ता अंधविश्वास के बने व्यापारी क्यूँ हैं,

दुख रॊग ही इंसान का जीवन है ओ सारे सुख हैं दुराचारी,
पर तेरे मंदिर मस्ज़िद में मस्त मलंग हर पुजारी क्यूँ है।

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