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माघ पूस की रात खुले में सोते बेघर, बेदर, बेकल बच्चे

माघ पूस की रात खुले में सोते बेघर, बेदर, बेकल बच्चे।
कैसे कहें इनके ईश्वर अल्लाह सबसे अच्छे, सबसे सच्चे।

माघ पूस की रात खुले में सोते बेघर, बेदर, बेकल बच्चे।
कैसे कहें इनके ईश्वर अल्लाह सबसे अच्छे, सबसे सच्चे।

माघ पूस की रात सड़क पर सोये माँ संग बचपन फटेहाल।
कैसे कहें इनके भगवान,भगवती सिंगार-पटार से मालामाल।

ये माघ पूस के रात दिन बच्चे बच्चियाँ करते भारी काम
कैसे कहें के इनके भाग्य विधाता ईसा, मुहम्म्द कि राम।

धूंध,धुएँ आग से मरते झुग्गी में अनपढ ज़ाहिल जनगण।
कैसे कहें के इनके परमपिता खुदाया सत चित आनंद घन।

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