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इतने सारे ऊपर वाले, फ़िरभी दुखी क्यूँ इंसान

ईश्वर अल्लाह परमपिता खुदा रहीम राम रहमान,
इतने सारे ऊपर वाले, फ़िरभी दुखी क्यूँ इंसान।

कभी जच्चा, कभी बच्चा, कभी दोनॊं मरते बेचारे,
किसके भरॊसे इनकॊं छॊड़ा उन्हॊंने, इन कॊ बेसहारे,
क्या इनकी खातिर नहीं है, एक भी दिव्य विधान।
ईश्वर अल्लाह परमपिता खुदा रहीम राम रहमान,
इतने सारे ऊपर वाले, फ़िर भी दुखी क्यूँ इंसान।

बाल मज़दुर, बाल वेश्या से भरा पड़ा है संसार,
किसके सहारे छॊड़ा उन्हॊंने इनकॊ स्वरूप उपहार,
क्या उनकी खातिर नहीम है कॊई नियम, प्रमाण,
ईश्वर अल्लाह परमपिता खुदा रहीम राम रहमान,
इतने सारे ऊपर वाले, फ़िर भी दुखी क्यूँ इंसान।

सही मज़दूरी मिलती नहीं कॊई करें कितना भी काम,
किसके लिए कर रखा है उन्हॊंने इनका जीना हराम,
क्यॊं नहीं है के लिए कॊई औतारी, पयंबरी आह्वान,
ईश्वर अल्लाह परमपिता खुदा रहीम राम रहमान,
इतने सारे ऊपर वाले, फ़िर भी दुखी क्यूँ इंसान।

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