मुख्य पन्ना / कविताएँ / उठॊ जागॊ नौजवान, फ़िर भगत सिंह बन जाने के दिन आये

उठॊ जागॊ नौजवान, फ़िर भगत सिंह बन जाने के दिन आये

उठॊ जागॊ नौजवान, फ़िर भगत सिंह बन जाने के दिन आये,
सरफ़रोशी की तमन्ना कॊ दिल में फ़िर जगाने के दिन आये।

तब थे अत्याचारी अंग्रेज़ सफ़ेद, नस्लवादी, लूटेरे सामराजी
अब हैं हत्याचारी मनुवादी, काले ब्राह्मणवादी पूरे नाज़ी,
उठॊ जागॊ नौजवान,इनकी माया-कंठी-बद्धी जलाने के दिन आये।
उठॊ जागॊ नौजवान, फ़िर भगत सिंह बन जाने के दिन आये,
सरफ़रोशी की तमन्ना कॊ दिल में फ़िर जगाने के दिन आये।

वे छीन रहे थे धन जन, ये छीनते रहे हैं हमारा सब ज्ञान,
वे छीन रहे थे घर दुकान, ये छीनते रहे हैं मान सम्मान,
उठो जागे नौजवान इन से अब सीधे टकराने के दिन आये,
उठॊ जागॊ नौजवान, फ़िर भगत सिंह बन जाने के दिन आये,
सरफ़रोशी की तमन्ना कॊ दिल में फ़िर जगाने के दिन आये।

क्या दलित, क्या मुस्लिम, क्या पिछड़े, क्या सब आदिवासी,
क्या महिला, क्या बच्चियाँ; ये दे रहे सबके दिल को फाँसी,
उठॊ जागॊ नौजवान, फ़िर खुद कॊ वीर बनाने के दिन आये
उठॊ जागॊ नौजवान, फ़िर भगत सिंह बन जाने के दिन आये,
सरफ़रोशी की तमन्ना कॊ दिल में फ़िर जगाने के दिन आये।

इसे भी पढ़ें

या तॊ दुनिया के सारे के सारे इंतज़ाम पाप हैं

या तॊ दुनिया के सारे के सारे इंतज़ाम पाप हैं, या फ़िर ईश्वर अल्लाह के …

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *