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तुम्हारा ये कहना सही है

तुम्हारा ये कहना सही है कि अपने जीवन पर तेरा बस नहीं रहा मगर ये कहना ठीक नही, कि तॊ अब कुछ भी नहीं हो सकता। जीवन अपना हो या पराया, सब कॊ चाहिए धन का सहारा, मन की साध पूरी करने से पहले इस ठाम, सबकॊ करने पड़ते हैं सब कॊ ही दूसरे काम, किसी कॊ कम, किसी कॊ ज्यादा, किसी को पूरा किसी कॊ आधा, तुम्हारे साथ भी हुआ ठीक यही है, सॊ ये कहना ठीक नहीं है, कि अब कुछ भी नहीं हॊ सकता। अब रॊटी, कपड़ा, मकान है तेरे पास, अब जॊ कुछ भी आता है तुझे रास, उसे करने की भरपूर कोशिश करॊ उसे करके अपने जीवन में नूर भरॊ, अपने मन से अपने साथी चुनॊ, अपने मन से अपने सपने बुनॊ, बदल जायेगी वो दुनिया जॊ रही है। इस लिए ये कहना ठीक नहीं है, अब कुछ भी नहीं हो सकता। पिता की छाया से जैसे बाहर आई, पति की माया से भी बाहर आऒ बाई बेटॆ की दाया से भी बाहर आऒ माई, फ़िर तुम किसी की न रहोगी पराई, अपने मन से पढ़ॊ,अपने मन से बढ़ॊ, अपने मन की सुनॊ अपने मन से जीऒ, वैसे भी ये दुनिया तुमसे बनी है, अतः …

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ये बलात्कारी देवॊं का देश है

ये बलात्कारी देवॊं का देश है। इस देश में देवियॊं बच के रहना। जहाँ इंद्र अहिल्या के पत कॊ बर्बाद करे, और उसे ही ऋषि पति पत्थर नाशाद करे, जहाँ अब भी नामर्दॊं में इंद्र का संश्लेष है उस देश में औरतों डट के लड़ना। ये बलात्कारी देवॊं का देश है। इस देश में देवियॊं बच के रहना। जहाँ ब्रह्मा बेटी के सत्त का नाश करे, जहाँ सरस्वती ही विलुप्तावास करे, जहाँ ब्रह्मा अब तक महापिता के वेश है, उस देश में बेटियॊं सच में डटना। ये बलात्कारी देवॊं का देश है। इस देश में देवियॊं बच के रहना। जहाँ विष्णु खुद वृंदा कॊ छल से वरे, कि वॊ बने तुलसी, उसका पति मरे, जहाँ सदा से महाजन में विष्णु शेष है, उस देश में बहनॊं संभल के बढना। ये बलात्कारी देवॊं का देश है। इस देश में देवियॊं बच के रहना। जहाँ प्रेम पाप है, बलात्कार विवाह है, सबसे ऊपर खाप है, मुश्किल निबाह है, ‘लड़िकाई के नेह’ से सबकॊ विद्वेष है, उस देश में अभी सिर्फ़ लिखना पढ़ना। ये बलात्कारी देवॊं का देश है। इस देश में देवियॊं बच के रहना।

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मज़हब ने ही है छीना प्यारा चमन हमारा

मज़हब ने ही है छीना प्यारा चमन हमारा । मज़हब ने ही है लूटा गंग ओ जमन हमारा। मज़हब से बाहर आये बिना होना नहीं उबारा। मज़हब ने ही किया है धरती मैया का कबाड़ा। कॊई हिंदू, कॊई मुसलमान तॊ कॊई है यहुदी, कॊई सिख, कॊई ईसाई, पर किसी में न बेखुदी, मज़हब ही है सिखाता इनकॊ लड़ना लड़ाना, मज़हब ने ही किया है धरती मैया का कबाड़ा। सब कहते’ बस हम सच्चे, बाकी सब झूठे हैं, पता नहीं कब से इनसे ईश्वर अल्लाह रूठे हैं, इनके अनाचार ने किया है सत्य नाश हमारा मज़हब ने ही किया है धरती मैया का कबाड़ा। कहीं दलित, कहीं नास्तिक, कही काफ़िर बनाया, मजहब ने मानव कॊ हर दम से शैतान बनाया, अनगिनत को मारा है, अनंत को है उजाड़ा मज़हब ने ही किया है धरती मैया का कबाड़ा। कहीं पंडित, कहीं मुल्ला, कहीं पादरी का राज है, सब के सुरॊं में बज रहा इक शैतान का साज है सहज सनेह के रिश्ते को सबने मिल बिगाड़ा, मज़हब ने ही किया है धरती मैया का कबाड़ा। साथ खाना, साथ पीना, साथ रहना सोना, इनके होते इस जगत में कभी नहीं है होना, इन्हॊंने ही इंसां के दिल से प्रेम पौध उखाड़ा। मज़हब ने …

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यहोवा के बच्चे मारें अल्लाह की संतान कॊ

यहोवा के बच्चे मारें अल्लाह की संतान कॊ, क्या कहें हम ऐसे परमेश्वर, ऐसे भगवान कॊ। यहूदी कहें हम सबसे ऊँचे,महान बच्चे है, अपने परमपिता के बीज अन्यतम सच्चे है, पर क्या कहें इनके खून की प्यासी जान कॊ यहोवा के बच्चे मारें अल्लाह की संतान कॊ, क्या कहें हम ऐसे परमेश्वर, ऐसे भगवान कॊ,। मुस्लिम कहे हम अल्लाह के असली वारिस है, उसकी तालीम के तालिबान हम खालिस है, पर क्या कहें हम इनके लहू के प्यासे मान कॊ, यहोवा के बच्चे मारें अल्लाह की संतान कॊ, क्या कहें हम ऐसे परमेश्वर, ऐसे भगवान कॊ,। ईसाई कहें हम सा नहीं कॊई इस जगती में कौन हॊ सकता आगे हमसे ईश की भगती मे, पर क्या कहें आत्मा की प्यासी इनकी शान कॊ यहोवा के बच्चे मारें अल्लाह की संतान कॊ, क्या कहें हम ऐसे परमेश्वर, ऐसे भगवान कॊ। एक आदम, एक हव्वा, सबमें एक ही रक्त है, पर उनकी संतान मानव अनंत में विभक्त है, चूस रहे हैं जाति धर्म इंसान के प्राण कॊ यहोवा के बच्चे मारें अल्लाह की संतान कॊ, क्या कहें हम ऐसे परमेश्वर, ऐसे भगवान कॊ। हत्या करने कॊ जॊ उकसाये वॊ कैसा सत्त है, जला के मारना जॊ सिखाये वॊ कैसा ऋत है क्या …

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अपने एकसिरताहे मित्रॊं के नाम

तुम किसी के दोस्त बन सकते हो न किसी से कर सकते हो प्यार। तेरा अहं बढ़ बढ़ के ब्रह्म बन गया है, तुम कर सकते हो सिर्फ़ संहार।। तेरी दुर्जेय आत्मा का तबतक नहीं हो सकता है कॊई भी सम्मान, जब तक कि किसी सज्जन का न कर दो तुम दलन और अपमान, तेरी आत्मा परमात्मा बन गई है, तुम ऐसे ही कर सकते हो उद्धार, तुम किसी के मित्र बन सकते हो न कर सकते हॊ किसी से सहकार। सारी दुनिया कॊ खा कर भी तेरी भूख नहीं हो सकती है कभी कम जब तक न ले लो तुम अनगिनत गरीबॊं और भूखे लोगॊं के दम, तेरा ऐश्वर्य परमेश्वर बन गया है, तुम सब कॊ कर सकते हो निराहार, तुम किसी के साथी बन सकते हॊ न कर सकते हो किसी का उपचार। त्रैलोक्य के राज को पा के भी तुम हो नहीं सकते कभी पूर्णकाम, जब तक कि न कर तुम किसी निश्छल, निरीह का काम तमाम, तेरा भोग भाग्य भगवान बन गया तुम सकते हो किसी को बस उजाड़, तुम किसी के सुहृत बन सकते हो न कर सकते हो किसी का हितकार। मगर तेरा ये संहार-उजाड़ चलता है बस किसी निर्बल कमजोर पे, तेरा ब्रह्म …

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वामपंथी ब्राह्मणवादी मित्रों के नाम

सारी दुनिया का अमर्ष अहंकार मुबारक हॊ तुझे, हमें तो भाई, अपना नन्हापन बहुत ही प्यारा है। तेरा ब्रह्म ओ वेदांत तुझे और कुछ बता नहीं सकता, सब को मिटा खुदा बनने सिवा कुछ सिखा नहीं सकता, दो नैनॊं में अग जग को तिरस्कार मुबारक हो तुझे, हमें तो साईं, अपना बंदापन बहुत ही प्यारा है। तेरा चित्त सर्वग्रासी है सो परमात्मा हो तुम, तेरा धर्म सत्यानाशी है सो धर्मात्मा हो तुम, सदा बढ़ने वाला कैंसरी हाहाकार मुबारक हो तुझे, हमें तो भाई, अपना आवारापन बहुत ही प्यारा है। तेरे सब अनाचार तुरंत सदाचार बन जाते हैं, तेरे सारे अज्ञान एकदम सुविचार बन जाते हैं तेरे मन में बैठा ब्रह्म बदकार मुबारक हो तुझे, हमें तो साईं अपना दिवानापन बहुत ही प्यारा है। दिल तो असल तेरे पास कभी भी रहा ही नहीं, और आत्मा में मेरा यकीन कभी हुआ ही नहीं, सो दिमाग़ में बैठी धृणा साकार मुबारक हो तुझे, हमें तो भाई अपना अनार्यपन बहुत ही प्यारा है।

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अपने समाजवादी मित्रॊं के नाम एक पयाम

मुझे तॊ कभी भी अपना समझे ही नहीं तुम, अपना तो क्या अपने जैसा समझे ही नहीं तुम। हम तेरे लिए अन्न उगाते रहे, हम तेरे लिए धन बनाते रहे, तेरे काम में मन लगाते रहे, तेरी लिए अपना तन गलाते रहे हम कर सकते कॊई कल्पना समझे ही नहीं तुम। सदा तेरा ही कहा मानते रहे, तुझे अपना हितु जानते रहे अपना गुरू तुझे पहचानते रहे तेरा गुण हम बखानते रहे, हम देख सकते हैं कोई सपना समझे ही नहीं तुम। ज्ञान विज्ञान में तेरा नाम रहा, कला दर्शन में तेरा काम रहा, तेरे लिए सब बिन दाम रहा, हमें अक्षर तक सदा हराम रहा, हम कर सकते हैं कॊई अर्चना समझे ही नहीं तुम। हम ने तुझे शिव पारबती बनाया, कभी भगवान ओ भगवती बनाया, कभी लगती कभी भगती बनाया, कभी अंबर कभी जगती बनाया, पर हम कर सकते हैं सर्जना समझे ही नहीं तुम। तुमने तो हमें पशु कभी दास समझा, हमारे मेहनत, हुनर कॊ बकवास समझा, हमारे ज्ञान, गीत कॊ उपहास समझा, हमारे रहन सहन कॊ ह्रास समझा, हम भी कर सकते हैं गवेषणा समझे ही नहीं तुम। पर अब कुछ ही वर्षॊं के दरमियान, हमने साध लिया है वो सारा ज्ञान, जो तुम हज़ारॊं साल …

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तुम्हारा साम्यवाद देखा, तुम्हारा समाजवाद देखा

तुम्हारा साम्यवाद देखा, तुम्हारा समाजवाद देखा, हर जगह अपने चमन को तेरे हाथॊं बर्बाद देखा। तुमने जॊ कुछ भी कहा, तुमने जो कुछ भी किया, उसका लाभ तेरे पुर्वजॊं और तेरे अग्रजॊं ने लिया, गण के नाम पर हमने तेरे सुजन कॊ आबाद देखा। तुम्हारा साम्यवाद देखा, तुम्हारा समाजवाद देखा, हर जगह अपने चमन को तेरे हाथॊं बर्बाद देखा। तुमने जो कुछ भी लिखा, तुमने जो कुछ भी पढ़ा, उसमें सदा अपने ही सुख चैन का तिलस्म गढ़ा, तुझे कभी लंदन, कभी लाल किले में आज़ाद देखा, तुम्हारा साम्यवाद देखा, तुम्हारा समाजवाद देखा, हर जगह अपने चमन को तेरे हाथॊं बर्बाद देखा। तेरा खान पान, आन जान हो कि तेरा रहन सहन, सबमें तुम रहे सदा फ़िरंगियॊं के ही तॊ हम वतन, अनुरागी आखॊं से भी हमने तुझे सदा सैय्याद देखा, तुम्हारा साम्यवाद देखा, तुम्हारा समाजवाद देखा, हर जगह अपने चमन को तेरे हाथॊं बर्बाद देखा। फ़िर भी जॊ तुमने किया उससे हमें शिकायत नहीं, हमने जॊ भी पाया तेरी ही जूठन ओ रियायत रही, पढ़ना तॊ दूर, हमने पूरखॊं कॊ बस बीज-खाद देखा। तुम्हारा साम्यवाद देखा, तुम्हारा समाजवाद देखा, हर जगह अपने चमन को तेरे हाथॊं बर्बाद देखा। अब हमने तेरे सारे ढॊंग, पाखंड कॊ पहचान लिया, तेरे राज …

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अरे, रोको,रोको इस सत्ता के हाथ

अरे, रोको,रोको इस सत्ता के हाथ, जॊ न रोक सको तो काट दो। ये हरियाली का हनन करने आये, हमारे जल में ज़हर भरने आये अरे रोको इस सत्ता की सब बात, जॊ न रोक सकॊ तॊ काट दो। ये हवा में दूषन फैलाने वाले, इस धरती का खून बहाने वाले, अरे, रोको, इस सत्ता के घात, जो न रोक सकॊ तॊ काट दो। हमारी नदियॊं को रोकते जाते, ये परबतॊं को ये खोदते जाते, रोको रोको इस सत्ता के मात, जॊ न रोक सकॊ तो काट दो। इन्हॊंने बचपन कॊ अपह्रित किया, हमारे यौवन कॊ बलात्कृत किया, धरती नष्ट करता ये सत्ता विराट, इसे छांट दो, इसे काट दो। ये देशी विदेशी तस्कर दलाल, इनके रहते न बचेंगे राधा गोपाल, जो न रूक सकें ये सत्ता सम्राट, इन्हें मार दो, इन्हें काट दो। इन्हॊंने हमारे गाँवॊं को उजाड़ा है, हमको अपनी जड़ॊं से उखाड़ा है, रोको, रोको इस सत्ता के उत्पात जो न रोक सको तो उसे काट दो। इतिहास के हत्यारॊं में सबसे निर्मम, अब तक के लुटॆरों में सबसे अधम, जो रूक सके ये सत्ता अभिजात, इसे काट दो, इसे काट दो। ज़िंदगी में कॊई न कॊई कमी रहे, आखॊं में कुछ न कुछ नमी रहे। ज़रूरी …

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अपनी श्रीमती नीलम के लिए, शादी की चौबीसवीं सालगिरह पर

तुम्हारे साथ बसते बसाते, चौबीस साल कैसे बीत गये, हमें पता ही न चला। तुम्हारे साथ लड़ते लड़ाते, चौबीस साल बीत कैसे गये, हमें पता भी न चला। चाँद सितारे कहीं ज्यादा सुंदर हैं, धरती अंबर कहीं ज्यादा सुघड़ हैं, इन पे तुझ संग रिझते रिझाते, चौबीस साल कैसे जीत गये हमें पता ही न चला। फूलॊं के रंग में ज्यादा चमक है, पंछी के गीत में ज्यादा झनक है, इन्हें तुझ संग देखते दिखाते, चौबीस साल कैसे मीत भये, हमें पता ही न चला। ये नहीं कि हमें कष्ट नहीं था, पर हमें रोने का वक्त नहीं था, उन्हें तेरे संग सहते सहाते, चौबीस साल कैसे हित भये, हमें पता ही न चला। हवा में अब वैसा ज़हर नहीं, पानी में अब वैसा कहर नहीं, इन संग तेरे साथ बहते बहाते, चौबीस साल कैसे ऋत भये, हमें पता भी न चला। भूख अब वैसे मारती नहीं, प्यास अब वैसे काटती नही, इनसे तेरे संग जूहते जुझाते, चौबीस साल कैसे हृत भये, हमें पता भी न चला। दिल ओ दिमाग अब खाली नहीं, ज्ञान विज्ञान पहले सा ज़ाली नही, इन संग तेरे साथ चलते चलाते, चौबीस साल कैसे बीत गये, हमें पता भी न चला। घर कभी बाहर की समस्या …

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