कविताएँ – ज्ञान विज्ञान विश्व विद्यालय http://gyanvigyanprasar.com Global School of Science and Philosophy Mon, 02 Jan 2017 12:52:53 +0000 en hourly 1 https://wordpress.org/?v=5.2.2 अगहन पूष की रात http://gyanvigyanprasar.com/2017/01/blog-post_535.html http://gyanvigyanprasar.com/2017/01/blog-post_535.html#respond Mon, 02 Jan 2017 12:52:53 +0000 http://gyanvigyanprasar.com/?p=535 अगहन पूष की रात और इधर सड़क पर सोते इंसान। उधर मंदिर मस्ज़िद में मस्ती काटॆं अल्ला ओ भगवान। अगहन पूष की रात औ जन धन से दीन दुखी है लोग, उधर मम्दिर मस्ज़िद में गिर रहे चांदी सोने के जोग, ऐसी भक्ति, ऐसी शक्ति देख कर कविराज भी हैं हैरान। अगहन पूष की रात …

The post अगहन पूष की रात appeared first on ज्ञान विज्ञान विश्व विद्यालय.

]]>
अगहन पूष की रात और इधर

सड़क पर सोते इंसान।
उधर मंदिर मस्ज़िद में मस्ती

काटॆं अल्ला ओ भगवान।

अगहन पूष की रात औ जन

धन से दीन दुखी है लोग,
उधर मम्दिर मस्ज़िद में गिर

रहे चांदी सोने के जोग,
ऐसी भक्ति, ऐसी शक्ति देख कर

कविराज भी हैं हैरान।
अगहन पूष की रात और इधर

सड़क पर सोते इंसान।
उधर मंदिर मस्ज़िद में मस्ती

काटॆं अल्ला ओ भगवान।
अगहन पूष की रात, भूख से

मरें आकुल व्याकुल बच्चे,
उधर मुल्ले पांडॆ को षटरस

व्यंजन, छप्पन भोग सच्चे,
ऐसी ही भुक्ति, ऐसी ही मुक्ति

देते बाईबिल, वेद, कुरान।
अगहन पूष की रात और इधर

सड़क पर सोते इंसान।
उधर मंदिर मस्ज़िद में मस्ती

काटॆं अल्ला ओ भगवान।
अगहन पूष की रात में कुड़ा

कर्कट जलाते ज़ाहिल जन,
उधर अपने घरॊं ऐश करे

सर्वज्ञानी खुदा ऒ आनंद घन,
ऐसी ही बुद्धि, ऐसी ही शुद्धि देते

है परम नवीन विद्वान।
अगहन पूष की रात और इधर

सड़क पर सोते इंसान।
उधर मंदिर मस्ज़िद में मस्ती

काटॆं अल्ला ओ भगवान।

The post अगहन पूष की रात appeared first on ज्ञान विज्ञान विश्व विद्यालय.

]]>
http://gyanvigyanprasar.com/2017/01/blog-post_535.html/feed 0
औरतें अल्लाहॊं, परमात्माऒं तथा खुदाऒं के समान होतीं है, http://gyanvigyanprasar.com/2016/06/blog-post_484.html http://gyanvigyanprasar.com/2016/06/blog-post_484.html#respond Fri, 10 Jun 2016 08:23:44 +0000 http://gyanvigyanprasar.com/?p=484 औरतें अल्लाहॊं, परमात्माऒं तथा खुदाऒं के समान होतीं है, सारे जड़ चेतन, चर अचर की मालकिन ओ भगवान हॊती है। उन्हीं की तरह ये जब जॊ चाहें कह सकती हैं, कर सकती है, किसी के भी हाथ राख तॊ किसी के हाथ लाख धर सकती है, औरतें धरती, प्रकृति की बहन, कुदरत का संविधान होती …

The post औरतें अल्लाहॊं, परमात्माऒं तथा खुदाऒं के समान होतीं है, appeared first on ज्ञान विज्ञान विश्व विद्यालय.

]]>
औरतें अल्लाहॊं, परमात्माऒं तथा खुदाऒं के समान होतीं है,

सारे जड़ चेतन, चर अचर की मालकिन ओ भगवान हॊती है।

trouble_in_arcadia___concepts_by_thejason10-d7xl9f3goddesses

उन्हीं की तरह ये जब जॊ चाहें कह सकती हैं, कर सकती है,

किसी के भी हाथ राख तॊ किसी के हाथ लाख धर सकती है,

औरतें धरती, प्रकृति की बहन, कुदरत का संविधान होती है।

औरतें अल्लाहॊं, परमात्माऒं तथा खुदाऒं के समान होतीं है,

सारे जड़ चेतन, चर अचर की मालकिन ओ भगवान हॊती है।

 

धन, धर्म और सता के सारे अनाचारॊं कॊ झेल कर भी बनी हैं,

तॊ अपनी ही ताकत से बनी है,आज पहली दफ़े यूँ तनी है,

इतनी सी बात से सब धर्मॊं की सत्ता आज हलकान हॊती है।

औरतें अल्लाहॊं, परमात्माऒं तथा खुदाऒं के समान होतीं है,

सारे जड़ चेतन, चर अचर की मालकिन ओ भगवान हॊती है।

 

अब वे एक बार फ़िर से महादेवी, जगदम्बा बनेंगी,

ग्राम-नगर देवी, सरस्वती, अन्नपूर्णा, अम्बा बनेंगी,

देखना उनके राज में कैसे ज़िंदगी फ़िर ग़ुलजान हॊती है।

औरतें अल्लाहॊं, परमात्माऒं तथा खुदाऒं के समान होतीं है,

सारे जड़ चेतन, चर अचर की मालकिन ओ भगवान हॊती है।

 

The post औरतें अल्लाहॊं, परमात्माऒं तथा खुदाऒं के समान होतीं है, appeared first on ज्ञान विज्ञान विश्व विद्यालय.

]]>
http://gyanvigyanprasar.com/2016/06/blog-post_484.html/feed 0
विद्रोह http://gyanvigyanprasar.com/2016/06/blog-post_476.html http://gyanvigyanprasar.com/2016/06/blog-post_476.html#respond Thu, 09 Jun 2016 06:53:47 +0000 http://gyanvigyanprasar.com/?p=476   उस हर औलाद कॊ हम नीम औकात समझते हैं, जॊ जवानी में अपने बाप कॊ बाप समझते हैं।   घर बाहर, दिन रात जॊ विद्रोह पे हो आमादा, उसी को हम नौजवानी की आब समझते है।   पिता से शुरू हॊ के जॊ द्रोह परमपिता तक जाये, उसी को हम माहताब-आफ़ताब समझते है।   …

The post विद्रोह appeared first on ज्ञान विज्ञान विश्व विद्यालय.

]]>
sonsofcore

 

उस हर औलाद कॊ हम नीम औकात समझते हैं,

जॊ जवानी में अपने बाप कॊ बाप समझते हैं।

 

घर बाहर, दिन रात जॊ विद्रोह पे हो आमादा,

उसी को हम नौजवानी की आब समझते है।

 

पिता से शुरू हॊ के जॊ द्रोह परमपिता तक जाये,

उसी को हम माहताब-आफ़ताब समझते है।

 

नौजवानॊं पर ही टिकी है हमारी सब उम्मीदें,

उनकी बेअदबी कॊ ही हम आदाब समझते है।

 

आदम से ही शुरू हुई रवायत ए आदमियत,

नाफ़रमानी कॊ हम आदमी की जात समझते है।

 

 

 

The post विद्रोह appeared first on ज्ञान विज्ञान विश्व विद्यालय.

]]>
http://gyanvigyanprasar.com/2016/06/blog-post_476.html/feed 0
या तॊ दुनिया के सारे के सारे इंतज़ाम पाप हैं http://gyanvigyanprasar.com/2016/04/blog-post_351.html http://gyanvigyanprasar.com/2016/04/blog-post_351.html#respond Mon, 18 Apr 2016 11:58:03 +0000 http://gyanvigyanprasar.com/?p=351 या तॊ दुनिया के सारे के सारे इंतज़ाम पाप हैं, या फ़िर ईश्वर अल्लाह के सब पैग़ाम पाप है।   एक ओर गगनचूंबी मंदिरमस्ज़िद गिरजे गुरूद्वारे, दूसरी तरफ़ मारे मारे फ़िरते इंसां बेघर बेसहारे, सो या तॊ ये सारे के सारे धर्म धाम पाप है, या फ़िर ईश्वर अल्लाह के सब पैग़ाम पाप हैं।   …

The post या तॊ दुनिया के सारे के सारे इंतज़ाम पाप हैं appeared first on ज्ञान विज्ञान विश्व विद्यालय.

]]>
या तॊ दुनिया के सारे के सारे इंतज़ाम पाप हैं,

या फ़िर ईश्वर अल्लाह के सब पैग़ाम पाप है।

 

एक ओर गगनचूंबी मंदिरमस्ज़िद गिरजे गुरूद्वारे,

दूसरी तरफ़ मारे मारे फ़िरते इंसां बेघर बेसहारे,

सो या तॊ ये सारे के सारे धर्म धाम पाप है,

या फ़िर ईश्वर अल्लाह के सब पैग़ाम पाप हैं।

 

गीता-इंज़िल-कुरआन-पुराण सब ज्ञान के भंडार हैं,

इधर निर्बल,निर्धन बच्चॊं कॊ हर अक्षर अंगार है,

तॊ या तॊ ये सब के सब धर्म के ठाम पाप हैं,

या फ़िर ईश्वर अल्लाह के सब पैग़ाम पाप है।

 

पुजारी-पादरी-मुल्ले-ग्रथी सब ऊपरवाले के कारसाज़

नीचे बेकस बेकल लोग, यहाँ हर जगह शैतान राज,

या तॊ इन सब के सारे के सारे धर्म-काम पाप हैं,

या फ़िर ईश्वर अल्लाह के सब पैग़ाम पाप है।

 

 

The post या तॊ दुनिया के सारे के सारे इंतज़ाम पाप हैं appeared first on ज्ञान विज्ञान विश्व विद्यालय.

]]>
http://gyanvigyanprasar.com/2016/04/blog-post_351.html/feed 0
उठॊ जागॊ नौजवान, फ़िर भगत सिंह बन जाने के दिन आये http://gyanvigyanprasar.com/2016/03/blog-post_339.html http://gyanvigyanprasar.com/2016/03/blog-post_339.html#respond Thu, 17 Mar 2016 13:07:38 +0000 http://gyanvigyanprasar.com/?p=339 उठॊ जागॊ नौजवान, फ़िर भगत सिंह बन जाने के दिन आये, सरफ़रोशी की तमन्ना कॊ दिल में फ़िर जगाने के दिन आये। तब थे अत्याचारी अंग्रेज़ सफ़ेद, नस्लवादी, लूटेरे सामराजी अब हैं हत्याचारी मनुवादी, काले ब्राह्मणवादी पूरे नाज़ी, उठॊ जागॊ नौजवान,इनकी माया-कंठी-बद्धी जलाने के दिन आये। उठॊ जागॊ नौजवान, फ़िर भगत सिंह बन जाने के …

The post उठॊ जागॊ नौजवान, फ़िर भगत सिंह बन जाने के दिन आये appeared first on ज्ञान विज्ञान विश्व विद्यालय.

]]>
उठॊ जागॊ नौजवान, फ़िर भगत सिंह बन जाने के दिन आये,
सरफ़रोशी की तमन्ना कॊ दिल में फ़िर जगाने के दिन आये।

तब थे अत्याचारी अंग्रेज़ सफ़ेद, नस्लवादी, लूटेरे सामराजी
अब हैं हत्याचारी मनुवादी, काले ब्राह्मणवादी पूरे नाज़ी,
उठॊ जागॊ नौजवान,इनकी माया-कंठी-बद्धी जलाने के दिन आये।
उठॊ जागॊ नौजवान, फ़िर भगत सिंह बन जाने के दिन आये,
सरफ़रोशी की तमन्ना कॊ दिल में फ़िर जगाने के दिन आये।

वे छीन रहे थे धन जन, ये छीनते रहे हैं हमारा सब ज्ञान,
वे छीन रहे थे घर दुकान, ये छीनते रहे हैं मान सम्मान,
उठो जागे नौजवान इन से अब सीधे टकराने के दिन आये,
उठॊ जागॊ नौजवान, फ़िर भगत सिंह बन जाने के दिन आये,
सरफ़रोशी की तमन्ना कॊ दिल में फ़िर जगाने के दिन आये।

क्या दलित, क्या मुस्लिम, क्या पिछड़े, क्या सब आदिवासी,
क्या महिला, क्या बच्चियाँ; ये दे रहे सबके दिल को फाँसी,
उठॊ जागॊ नौजवान, फ़िर खुद कॊ वीर बनाने के दिन आये
उठॊ जागॊ नौजवान, फ़िर भगत सिंह बन जाने के दिन आये,
सरफ़रोशी की तमन्ना कॊ दिल में फ़िर जगाने के दिन आये।

The post उठॊ जागॊ नौजवान, फ़िर भगत सिंह बन जाने के दिन आये appeared first on ज्ञान विज्ञान विश्व विद्यालय.

]]>
http://gyanvigyanprasar.com/2016/03/blog-post_339.html/feed 0
इतने सारे ऊपर वाले, फ़िरभी दुखी क्यूँ इंसान http://gyanvigyanprasar.com/2016/03/blog-post_324.html http://gyanvigyanprasar.com/2016/03/blog-post_324.html#respond Mon, 07 Mar 2016 09:37:22 +0000 http://gyanvigyanprasar.com/?p=324 ईश्वर अल्लाह परमपिता खुदा रहीम राम रहमान, इतने सारे ऊपर वाले, फ़िरभी दुखी क्यूँ इंसान। कभी जच्चा, कभी बच्चा, कभी दोनॊं मरते बेचारे, किसके भरॊसे इनकॊं छॊड़ा उन्हॊंने, इन कॊ बेसहारे, क्या इनकी खातिर नहीं है, एक भी दिव्य विधान। ईश्वर अल्लाह परमपिता खुदा रहीम राम रहमान, इतने सारे ऊपर वाले, फ़िर भी दुखी क्यूँ …

The post इतने सारे ऊपर वाले, फ़िरभी दुखी क्यूँ इंसान appeared first on ज्ञान विज्ञान विश्व विद्यालय.

]]>
ईश्वर अल्लाह परमपिता खुदा रहीम राम रहमान,
इतने सारे ऊपर वाले, फ़िरभी दुखी क्यूँ इंसान।

कभी जच्चा, कभी बच्चा, कभी दोनॊं मरते बेचारे,
किसके भरॊसे इनकॊं छॊड़ा उन्हॊंने, इन कॊ बेसहारे,
क्या इनकी खातिर नहीं है, एक भी दिव्य विधान।
ईश्वर अल्लाह परमपिता खुदा रहीम राम रहमान,
इतने सारे ऊपर वाले, फ़िर भी दुखी क्यूँ इंसान।

बाल मज़दुर, बाल वेश्या से भरा पड़ा है संसार,
किसके सहारे छॊड़ा उन्हॊंने इनकॊ स्वरूप उपहार,
क्या उनकी खातिर नहीम है कॊई नियम, प्रमाण,
ईश्वर अल्लाह परमपिता खुदा रहीम राम रहमान,
इतने सारे ऊपर वाले, फ़िर भी दुखी क्यूँ इंसान।

सही मज़दूरी मिलती नहीं कॊई करें कितना भी काम,
किसके लिए कर रखा है उन्हॊंने इनका जीना हराम,
क्यॊं नहीं है के लिए कॊई औतारी, पयंबरी आह्वान,
ईश्वर अल्लाह परमपिता खुदा रहीम राम रहमान,
इतने सारे ऊपर वाले, फ़िर भी दुखी क्यूँ इंसान।

The post इतने सारे ऊपर वाले, फ़िरभी दुखी क्यूँ इंसान appeared first on ज्ञान विज्ञान विश्व विद्यालय.

]]>
http://gyanvigyanprasar.com/2016/03/blog-post_324.html/feed 0
इस देश का कॊइ मंतरी या प्रधान है कि नहीं http://gyanvigyanprasar.com/2016/03/blog-post_321.html http://gyanvigyanprasar.com/2016/03/blog-post_321.html#respond Mon, 07 Mar 2016 09:34:13 +0000 http://gyanvigyanprasar.com/?p=321 कॊई कानून से ऊपर तॊ कॊई कानून से बाहर है, अरे, इस देश का कॊइ मंतरी या प्रधान है कि नहीं। कहीं हत अखलाक तॊ कहीं बलात्कृत ज्यॊति है, माँ भारती सिसक सिसक कर दिन रात रोती है, आज कवि सवाल पूछता सिर झुकाये सादर है, अरे, इस देश का कॊई पति या प्रधान है …

The post इस देश का कॊइ मंतरी या प्रधान है कि नहीं appeared first on ज्ञान विज्ञान विश्व विद्यालय.

]]>
कॊई कानून से ऊपर तॊ कॊई कानून से बाहर है,
अरे, इस देश का कॊइ मंतरी या प्रधान है कि नहीं।

कहीं हत अखलाक तॊ कहीं बलात्कृत ज्यॊति है,
माँ भारती सिसक सिसक कर दिन रात रोती है,
आज कवि सवाल पूछता सिर झुकाये सादर है,
अरे, इस देश का कॊई पति या प्रधान है कि नहीं।

कहीं कलबुर्गी मरे हैं तॊ कहीं पनसारे पड़ॆ है,
इनके हत्यारे सीना ताने हर चौराहे पर खड़ॆ है,
सो शायर ये सवाल पूछता विनय में आकर है,
इस देश का कॊई पति या प्रधान है कि नहीं।

दाभोलकर की हत्या कहीं रोहित की आत्महत्या है,
और इनके संघाती कर रहे सत्य तॊ अब मिथ्या है,
इसलिए गीतकार पूछ रहा ये सब रो-गा कर है,
इस देश का कॊई पति या प्रधान है कि नहीं।

The post इस देश का कॊइ मंतरी या प्रधान है कि नहीं appeared first on ज्ञान विज्ञान विश्व विद्यालय.

]]>
http://gyanvigyanprasar.com/2016/03/blog-post_321.html/feed 0
माघ पूस की रात खुले में सोते बेघर, बेदर, बेकल बच्चे http://gyanvigyanprasar.com/2015/12/blog-post_107.html http://gyanvigyanprasar.com/2015/12/blog-post_107.html#respond Wed, 30 Dec 2015 13:22:00 +0000 माघ पूस की रात खुले में सोते बेघर, बेदर, बेकल बच्चे। कैसे कहें इनके ईश्वर अल्लाह सबसे अच्छे, सबसे सच्चे। माघ पूस की रात खुले में सोते बेघर, बेदर, बेकल बच्चे। कैसे कहें इनके ईश्वर अल्लाह सबसे अच्छे, सबसे सच्चे। माघ पूस की रात सड़क पर सोये माँ संग बचपन फटेहाल। कैसे कहें इनके भगवान,भगवती …

The post माघ पूस की रात खुले में सोते बेघर, बेदर, बेकल बच्चे appeared first on ज्ञान विज्ञान विश्व विद्यालय.

]]>
माघ पूस की रात खुले में सोते बेघर, बेदर, बेकल बच्चे।
कैसे कहें इनके ईश्वर अल्लाह सबसे अच्छे, सबसे सच्चे।

माघ पूस की रात खुले में सोते बेघर, बेदर, बेकल बच्चे।
कैसे कहें इनके ईश्वर अल्लाह सबसे अच्छे, सबसे सच्चे।

माघ पूस की रात सड़क पर सोये माँ संग बचपन फटेहाल।
कैसे कहें इनके भगवान,भगवती सिंगार-पटार से मालामाल।

ये माघ पूस के रात दिन बच्चे बच्चियाँ करते भारी काम
कैसे कहें के इनके भाग्य विधाता ईसा, मुहम्म्द कि राम।

धूंध,धुएँ आग से मरते झुग्गी में अनपढ ज़ाहिल जनगण।
कैसे कहें के इनके परमपिता खुदाया सत चित आनंद घन।

The post माघ पूस की रात खुले में सोते बेघर, बेदर, बेकल बच्चे appeared first on ज्ञान विज्ञान विश्व विद्यालय.

]]>
http://gyanvigyanprasar.com/2015/12/blog-post_107.html/feed 0
मारे मारे फिरते हैं बेकस बेकल इंसान http://gyanvigyanprasar.com/2015/12/blog-post_108.html http://gyanvigyanprasar.com/2015/12/blog-post_108.html#respond Wed, 30 Dec 2015 11:43:00 +0000 http://gyanvigyanprasar.com/%e0%a4%95%e0%a4%b5%e0%a4%bf%e0%a4%a4%e0%a4%be%e0%a4%8f%e0%a4%81/108/ मारे मारे फिरते हैं बेकस बेकल इंसान, कैसे तेरे अल्लाह,खुदाया,परमपिता भगवान। इस कदर भूखे प्यासे जन औ माघ पुस की रात, हैवानॊं से भी गई बीती है मानुष की जात, देख कर इनकी हालत दुखी औ पस्त है शैतान। मारे मारे फिरते हैं बेकस बेकल इंसान, कैसे तेरे अल्लाह,खुदाया,परमपिता भगवान। इस कदर भूखे प्यासे जन …

The post मारे मारे फिरते हैं बेकस बेकल इंसान appeared first on ज्ञान विज्ञान विश्व विद्यालय.

]]>
मारे मारे फिरते हैं बेकस बेकल इंसान,
कैसे तेरे अल्लाह,खुदाया,परमपिता भगवान।

इस कदर भूखे प्यासे जन औ माघ पुस की रात,
हैवानॊं से भी गई बीती है मानुष की जात,

देख कर इनकी हालत दुखी औ पस्त है शैतान।

मारे मारे फिरते हैं बेकस बेकल इंसान,
कैसे तेरे अल्लाह,खुदाया,परमपिता भगवान।

इस कदर भूखे प्यासे जन औ माघ पुस की रात,
हैवानॊं से भी गई बीती है मानुष की जात,

देख कर इनकी हालत दुखी औ पस्त है शैतान।
मारे मारे फिरते हैं बेकस बेकल इंसान,

कैसे तेरे अल्लाह,खुदाया,परमपिता भगवान।

बेघर बेदर लोग ऊपर से माघ पूस की रैन,
इतने दुखी न पशु पंछी, न ही जड़ चेतन बेचैन,

इनकी बदहाली पे हैं जीव जंतू भी हैरान।

मारे मारे फिरते हैं बेकस बेकल इंसान,
कैसे तेरे अल्लाह,खुदाया,परमपिता भगवान।

इतने अनपढ़ ज़ाहिल फ़िर माघ पूस के चाँद तारे,
धुँए, धूंध कभी आग से जलते प्राणी प्यारे,

इनके हाल से कातर सब चर अचर जगत हलकान।

मारे मारे फिरते हैं बेकस बेकल इंसान,
कैसे तेरे अल्लाह,खुदाया,परमपिता भगवान।

The post मारे मारे फिरते हैं बेकस बेकल इंसान appeared first on ज्ञान विज्ञान विश्व विद्यालय.

]]>
http://gyanvigyanprasar.com/2015/12/blog-post_108.html/feed 0
अपना देश बड़ा प्यारा देश http://gyanvigyanprasar.com/2015/12/blog-post_109.html http://gyanvigyanprasar.com/2015/12/blog-post_109.html#respond Fri, 11 Dec 2015 13:36:00 +0000 अपना देश बड़ा प्यारा देश, जिसकी लाठी उसी की भैंस। वैज्ञानिक बन गये हैं सब पाखंडी, विद्वान हो गया है हर हर शिखंडी, अब कौन किसकॊ रोके नरेश। अपना देश बड़ा प्यारा देश, जिसकी लाठी उसी की भैंस। साहित्यकार बन गये सब कायर, बुज़दिल हो गये हैं सारे शायर, कौन कहे कि राजा नग्न वेश। …

The post अपना देश बड़ा प्यारा देश appeared first on ज्ञान विज्ञान विश्व विद्यालय.

]]>
अपना देश बड़ा प्यारा देश,
जिसकी लाठी उसी की भैंस।

वैज्ञानिक बन गये हैं सब पाखंडी,
विद्वान हो गया है हर हर शिखंडी,
अब कौन किसकॊ रोके नरेश।

अपना देश बड़ा प्यारा देश,
जिसकी लाठी उसी की भैंस।

साहित्यकार बन गये सब कायर,
बुज़दिल हो गये हैं सारे शायर,
कौन कहे कि राजा नग्न वेश।
अपना देश बड़ा प्यारा देश,
जिसकी लाठी उसी की भैंस।

राजा का चल रहा है राज,
जनता का गल रहा है ताज,
फल रहा अनाचार निर्निमेष।
अपना देश बड़ा प्यारा देश,
जिसकी लाठी उसी की भैंस।

भूखे को अन्न न प्यासे को पानी
मूर्ख को ज्ञान न राजा को रानी,
भारत माँ के दिल कॊ भारी ठेस।
अपना देश बड़ा प्यारा देश,
जिसकी लाठी उसी की भैंस।

न्याय की आँखें अब चार चार,
ऊँच नीच देखे है दीदे कॊ फाड़,
न्याय देवी के रहे न वस्त्र शेष।
अपना देश बड़ा प्यारा देश,
जिसकी लाठी उसी की भैंस।

न्याय-अन्याय की हो गई शादी,
धन, धर्म, सत्ता की बढ़ी आबादी,
जन की चिंता कौन करे जनेश।
अपना देश बड़ा प्यारा देश,
जिसकी लाठी उसी की भैंस।

आऒ अब कुछ ऐसा यूँ करें,
जिसकी भैंस हो वही लाठी धरे,
तभी मिटेगा जन का क्लेश
अपना देश बड़ा प्यारा देश,
जिसकी लाठी उसी की भैंस।

जंगल पहाड़ पर जॊ पूँजी काबिज़,
कैसे रहेगी धरती हरियाली साबित,
अब न करने दें धनिकॊं कॊ ऐश
अपना देश बड़ा प्यारा देश,
जिसकी लाठी उसी की भैंस।

The post अपना देश बड़ा प्यारा देश appeared first on ज्ञान विज्ञान विश्व विद्यालय.

]]>
http://gyanvigyanprasar.com/2015/12/blog-post_109.html/feed 0