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दिल्ली डायरी

June, 2016

  • 1 June

    दिल्ली डायरी

    Delhi Diary इस स्तम्भ की शुरुआत मैं एक नये तरीके से कर रहा हूँ। इस में मैं सबसे बाद में देखे या सुने कार्यक्रम का जिक्र सबसे पहले करूँगा।     सो इस सिलसिले में मैं शुरूआत सबसे पहले कल ही श्रीराम सेंटर में देखे गये एक नाटक से करना चाहता हूँ। (1) कल जिस नाटक कॊ मैंने देखा उसमें एक ही इंसान के खंड खंड व्यक्तित्व की कहानी है। इस कहानी का नाम द्रौपदी है। इसमें ऊपर से देखें तॊ एक भरा पूरा खुशहाल और एकल परिवार है। इसमें पति पत्नी और दो बच्चे है। समय के साथ जीवन के भीतरी बाहरी दबावॊं के कारण पति का व्यक्तित्व पाँच हिस्से में बंट जाता है। एक हिस्सा एक दवा कंपनी के मुलाज़िम का है। दूसरा हिस्सा एक शराबी का है। तीसरा हिस्सा एक ऐय्याश इंसान का है चौथा हिस्सा उस इंसान का है जॊ जीवन कॊ न्याय नीति के साथ जीना चाहता है। सबसे बुरी हालत इसी हिस्से की होती है। जब नायक अपने दफ़्तर में घॊटाला करता है तॊ उसका एक हाथ सड़ जाता है। ज्ब नायक अपनी कार से एक बच्चे कॊ कुचलने के बाद भाग जाता है तॊ उसकी एक पैर सड़ जाता है। जब उसकी प्रेमिका …