मासिक आर्काइव: May 2015

धर्म या मज़हब के बारे में मार्क्स के ख्याल तथा आज के ज़माने में उनकी ज़रूरत

धर्म की सतत आलोचना करते रहना ही आलॊचना का सतत धर्म है। दुख की बात है कि भारत में आज धर्म की आलोचना नहीं हॊ रही है। आज हर तरह के अंध विश्वास जन जीवन में फैलते जा रहे हैं। मगर कॊई इनके खिलाफ़ कुछ भी नहीं कर रहा है। वास्तव में मार्क्स धर्म की समालोचना कॊ फ़लसफ़े का सबसे ज़रूरी काम मानते थे। वे इसे क्रांति कर्म का पहला कदम मानते थे। हेगेल की किताब ‘ फ़िलॉसफ़ी ऑफ़ राईट ‘ की भूमिका के तौर पर उन्हॊंने जॊ भी लिखा था वॊ धर्म के बारे में उनके सिद्धांतॊं का एक तरह से निचॊड़ है। मैं सबसे पहले मार्क्स के धर्मसंबंधी इस लेख के विचारॊं का अनुवाद रखना चाहता हूँ: ‘जैसे ही हम स्वर्ग और परमात्मा तथा धर्मवेदी के सिद्धांतॊं का खंडन करते हैं वैसे ही इंसान के नापाक वज़ूद की जॊ भयंकर ग़लती ह्या वह नष्ट हॊने कॊ आ जाती है। हमारे ऐसा करते ही वही इंसान जॊ अब तक धार्मिक स्वर्ग की अति काल्पनिक दुनिया में जी रहा था तथा जिसमें वॊ अपने लिए किसी अतिमानव की तलाश कर रहा था; वह अब किसी भी तरह से सिर्फ़ अपने आप के ख्याल या अपनी खुदी के ख्याल से संतुष्ट …

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प्यारा अफ़लातून

ये किताब ग्यारह खंडॊं में है। इसके खंडॊ में अफ़लातून के फ़लसफ़े के विभिन्न पहलुऒं के ऊपर चर्चा की गई है तथा उस विषय से संबंधित सम्वादॊं के अनुवाद भी हैं और उन सम्वादॊं के बारे में दुनिया भर के महानतम दार्शनिकॊं और वैज्ञानिकॊं के विचार भी हैं तथा साथ साथ उसमें कुछ कहानिया और कवितायें भी हैं जॊ फ़लसफ़े के संबंधित पहलुऒं कॊ आसानी से समझने में मदद करती हैं।

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जब से अल्लाह के बंदॊं के बीच छिड़ी है जंग,

जब से अल्लाह के बंदॊं के बीच छिड़ी है जंग, तब से खुदा के नूर का उतरता जा रहा है रंग। कहीं शिया-सुन्नी भिड़ॆ हैं, कहीं अहमदिया मरे हैं, और हर जगह बहाबी सबके विरूद्ध अड़ॆ-लड़ॆ हैं, इनकी मारकाट कॊ देख फ़रिश्ते भी हैं दग। जब से अल्लाह के बंदॊं के बीच छिड़ी है ज़ंग, तब से खुदा के नूर का उतरता जा रहा है रंग। उम्मा राज ला रहा कॊई खिलाफ़त मचा रहा, सुन्नत में लगा है कॊई शरीयत ही लगा रहा, इन सब के कुँए में ही पड़ी है जहरीली भंग जब से अल्लाह के बंदॊं के बीच छिड़ी है ज़ंग, तब से खुदा के नूर का उतरता जा रहा है रंग। सारे जग कॊ मुसलमान बनाने में ये लगे हुए, जो काम अल्लाह ने ना किया उसी में पगे हुए, इनके अनाचार से शैतान कॊ मिला सत्संग, जब से अल्लाह के बंदॊं के बीच छिड़ी है ज़ंग, तब से खुदा के नूर का उतरता जा रहा है रंग। सारी दुनिया के मालिक का राज छॊटा हो रहा, उसकी नज़र में मज़हब का सिक्का खोटा हो रहा, ऐसे मज़हबी लोगॊं बेहतर उसे काफ़िर मलंग, जब से अल्लाह के बंदॊं के बीच छिड़ी है ज़ंग, तब से खुदा के …

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ईश्वर, अल्लाह, भगवानॊं ने नाश दिया संसार

ईश्वर, अल्लाह, भगवानॊं ने नाश दिया संसार, आऒ अब इनका नाश कर हम लायें नई बहार। मंदिर, मस्ज़िद गुरूद्वारॊं में है जमा अपार धन, इधर फ़िरते हम भूखे प्यासे और आधे नंगे तन, आऒ इनमें शुरू करे हम पढ़ाई दवाई कारोबार, ईश्वर, अल्लाह, भगवानॊं ने नाश दिया संसार, आऒ अब इनका नाश कर हम लायें नई बहार। गीता-कुरान-बाईबिल-पुराण उगाते आतंक-ज़हर-फल, इनके पन्नॊ की आग से हम रहे सदा से मर जल, आऒ इनकी जगह हम रोपॆं रूमानी-रूहानी प्यार, ईश्वर, अल्लाह, भगवानॊं ने नाश दिया संसार, आऒ अब इनका नाश कर हम लायें नई बहार। पुजारी-पादरी-मुल्ले-ग्रंथी के हाथॊं सिमटी सारी ताकत, इन्हीं पैदा से होती है मार काट की सारी आफ़त, आऒ इन्हें हटा के बनायें मंसूर-मज़्दक की सरकार, ईश्वर, अल्लाह, भगवानॊं ने नाश दिया संसार, आऒ अब इनका नाश कर हम लायें नई बहार। हिंदू-मुस्लिम-सिख-ईसाई हम बने रहेंगे जब तक, सपने में भी नहीं रहेंगे सुखचैन धरा पे तबतक, आऒ इन से आगे बढ़ें सुकरात-सरमद संग साकार, ईश्वर, अल्लाह, भगवानॊं ने नाश दिया संसार, आऒ अब इनका नाश कर हम लायें नई बहार।

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तुम्हारा ये कहना सही है

तुम्हारा ये कहना सही है कि अपने जीवन पर तेरा बस नहीं रहा मगर ये कहना ठीक नही, कि तॊ अब कुछ भी नहीं हो सकता। जीवन अपना हो या पराया, सब कॊ चाहिए धन का सहारा, मन की साध पूरी करने से पहले इस ठाम, सबकॊ करने पड़ते हैं सब कॊ ही दूसरे काम, किसी कॊ कम, किसी कॊ ज्यादा, किसी को पूरा किसी कॊ आधा, तुम्हारे साथ भी हुआ ठीक यही है, सॊ ये कहना ठीक नहीं है, कि अब कुछ भी नहीं हॊ सकता। अब रॊटी, कपड़ा, मकान है तेरे पास, अब जॊ कुछ भी आता है तुझे रास, उसे करने की भरपूर कोशिश करॊ उसे करके अपने जीवन में नूर भरॊ, अपने मन से अपने साथी चुनॊ, अपने मन से अपने सपने बुनॊ, बदल जायेगी वो दुनिया जॊ रही है। इस लिए ये कहना ठीक नहीं है, अब कुछ भी नहीं हो सकता। पिता की छाया से जैसे बाहर आई, पति की माया से भी बाहर आऒ बाई बेटॆ की दाया से भी बाहर आऒ माई, फ़िर तुम किसी की न रहोगी पराई, अपने मन से पढ़ॊ,अपने मन से बढ़ॊ, अपने मन की सुनॊ अपने मन से जीऒ, वैसे भी ये दुनिया तुमसे बनी है, अतः …

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ये बलात्कारी देवॊं का देश है

ये बलात्कारी देवॊं का देश है। इस देश में देवियॊं बच के रहना। जहाँ इंद्र अहिल्या के पत कॊ बर्बाद करे, और उसे ही ऋषि पति पत्थर नाशाद करे, जहाँ अब भी नामर्दॊं में इंद्र का संश्लेष है उस देश में औरतों डट के लड़ना। ये बलात्कारी देवॊं का देश है। इस देश में देवियॊं बच के रहना। जहाँ ब्रह्मा बेटी के सत्त का नाश करे, जहाँ सरस्वती ही विलुप्तावास करे, जहाँ ब्रह्मा अब तक महापिता के वेश है, उस देश में बेटियॊं सच में डटना। ये बलात्कारी देवॊं का देश है। इस देश में देवियॊं बच के रहना। जहाँ विष्णु खुद वृंदा कॊ छल से वरे, कि वॊ बने तुलसी, उसका पति मरे, जहाँ सदा से महाजन में विष्णु शेष है, उस देश में बहनॊं संभल के बढना। ये बलात्कारी देवॊं का देश है। इस देश में देवियॊं बच के रहना। जहाँ प्रेम पाप है, बलात्कार विवाह है, सबसे ऊपर खाप है, मुश्किल निबाह है, ‘लड़िकाई के नेह’ से सबकॊ विद्वेष है, उस देश में अभी सिर्फ़ लिखना पढ़ना। ये बलात्कारी देवॊं का देश है। इस देश में देवियॊं बच के रहना।

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मज़हब ने ही है छीना प्यारा चमन हमारा

मज़हब ने ही है छीना प्यारा चमन हमारा । मज़हब ने ही है लूटा गंग ओ जमन हमारा। मज़हब से बाहर आये बिना होना नहीं उबारा। मज़हब ने ही किया है धरती मैया का कबाड़ा। कॊई हिंदू, कॊई मुसलमान तॊ कॊई है यहुदी, कॊई सिख, कॊई ईसाई, पर किसी में न बेखुदी, मज़हब ही है सिखाता इनकॊ लड़ना लड़ाना, मज़हब ने ही किया है धरती मैया का कबाड़ा। सब कहते’ बस हम सच्चे, बाकी सब झूठे हैं, पता नहीं कब से इनसे ईश्वर अल्लाह रूठे हैं, इनके अनाचार ने किया है सत्य नाश हमारा मज़हब ने ही किया है धरती मैया का कबाड़ा। कहीं दलित, कहीं नास्तिक, कही काफ़िर बनाया, मजहब ने मानव कॊ हर दम से शैतान बनाया, अनगिनत को मारा है, अनंत को है उजाड़ा मज़हब ने ही किया है धरती मैया का कबाड़ा। कहीं पंडित, कहीं मुल्ला, कहीं पादरी का राज है, सब के सुरॊं में बज रहा इक शैतान का साज है सहज सनेह के रिश्ते को सबने मिल बिगाड़ा, मज़हब ने ही किया है धरती मैया का कबाड़ा। साथ खाना, साथ पीना, साथ रहना सोना, इनके होते इस जगत में कभी नहीं है होना, इन्हॊंने ही इंसां के दिल से प्रेम पौध उखाड़ा। मज़हब ने …

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यहोवा के बच्चे मारें अल्लाह की संतान कॊ

यहोवा के बच्चे मारें अल्लाह की संतान कॊ, क्या कहें हम ऐसे परमेश्वर, ऐसे भगवान कॊ। यहूदी कहें हम सबसे ऊँचे,महान बच्चे है, अपने परमपिता के बीज अन्यतम सच्चे है, पर क्या कहें इनके खून की प्यासी जान कॊ यहोवा के बच्चे मारें अल्लाह की संतान कॊ, क्या कहें हम ऐसे परमेश्वर, ऐसे भगवान कॊ,। मुस्लिम कहे हम अल्लाह के असली वारिस है, उसकी तालीम के तालिबान हम खालिस है, पर क्या कहें हम इनके लहू के प्यासे मान कॊ, यहोवा के बच्चे मारें अल्लाह की संतान कॊ, क्या कहें हम ऐसे परमेश्वर, ऐसे भगवान कॊ,। ईसाई कहें हम सा नहीं कॊई इस जगती में कौन हॊ सकता आगे हमसे ईश की भगती मे, पर क्या कहें आत्मा की प्यासी इनकी शान कॊ यहोवा के बच्चे मारें अल्लाह की संतान कॊ, क्या कहें हम ऐसे परमेश्वर, ऐसे भगवान कॊ। एक आदम, एक हव्वा, सबमें एक ही रक्त है, पर उनकी संतान मानव अनंत में विभक्त है, चूस रहे हैं जाति धर्म इंसान के प्राण कॊ यहोवा के बच्चे मारें अल्लाह की संतान कॊ, क्या कहें हम ऐसे परमेश्वर, ऐसे भगवान कॊ। हत्या करने कॊ जॊ उकसाये वॊ कैसा सत्त है, जला के मारना जॊ सिखाये वॊ कैसा ऋत है क्या …

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अपने एकसिरताहे मित्रॊं के नाम

तुम किसी के दोस्त बन सकते हो न किसी से कर सकते हो प्यार। तेरा अहं बढ़ बढ़ के ब्रह्म बन गया है, तुम कर सकते हो सिर्फ़ संहार।। तेरी दुर्जेय आत्मा का तबतक नहीं हो सकता है कॊई भी सम्मान, जब तक कि किसी सज्जन का न कर दो तुम दलन और अपमान, तेरी आत्मा परमात्मा बन गई है, तुम ऐसे ही कर सकते हो उद्धार, तुम किसी के मित्र बन सकते हो न कर सकते हॊ किसी से सहकार। सारी दुनिया कॊ खा कर भी तेरी भूख नहीं हो सकती है कभी कम जब तक न ले लो तुम अनगिनत गरीबॊं और भूखे लोगॊं के दम, तेरा ऐश्वर्य परमेश्वर बन गया है, तुम सब कॊ कर सकते हो निराहार, तुम किसी के साथी बन सकते हॊ न कर सकते हो किसी का उपचार। त्रैलोक्य के राज को पा के भी तुम हो नहीं सकते कभी पूर्णकाम, जब तक कि न कर तुम किसी निश्छल, निरीह का काम तमाम, तेरा भोग भाग्य भगवान बन गया तुम सकते हो किसी को बस उजाड़, तुम किसी के सुहृत बन सकते हो न कर सकते हो किसी का हितकार। मगर तेरा ये संहार-उजाड़ चलता है बस किसी निर्बल कमजोर पे, तेरा ब्रह्म …

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वामपंथी ब्राह्मणवादी मित्रों के नाम

सारी दुनिया का अमर्ष अहंकार मुबारक हॊ तुझे, हमें तो भाई, अपना नन्हापन बहुत ही प्यारा है। तेरा ब्रह्म ओ वेदांत तुझे और कुछ बता नहीं सकता, सब को मिटा खुदा बनने सिवा कुछ सिखा नहीं सकता, दो नैनॊं में अग जग को तिरस्कार मुबारक हो तुझे, हमें तो साईं, अपना बंदापन बहुत ही प्यारा है। तेरा चित्त सर्वग्रासी है सो परमात्मा हो तुम, तेरा धर्म सत्यानाशी है सो धर्मात्मा हो तुम, सदा बढ़ने वाला कैंसरी हाहाकार मुबारक हो तुझे, हमें तो भाई, अपना आवारापन बहुत ही प्यारा है। तेरे सब अनाचार तुरंत सदाचार बन जाते हैं, तेरे सारे अज्ञान एकदम सुविचार बन जाते हैं तेरे मन में बैठा ब्रह्म बदकार मुबारक हो तुझे, हमें तो साईं अपना दिवानापन बहुत ही प्यारा है। दिल तो असल तेरे पास कभी भी रहा ही नहीं, और आत्मा में मेरा यकीन कभी हुआ ही नहीं, सो दिमाग़ में बैठी धृणा साकार मुबारक हो तुझे, हमें तो भाई अपना अनार्यपन बहुत ही प्यारा है।

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