मासिक आर्काइव: September 2015

अरे इस धरती का कॊई ईश्वर अल्लाह या परमपिता है कि नहीं।

इधर देखॊ तो लूट पाट, उधर देखॊ तॊ मार काट, अरे इस पृथ्वी का कॊई ईश्वर अल्लाह या परमपिता है कि नहीं। जल रहे हैं इंसानी सभ्यता के जनम स्थान, मज़हब की मार से मानवता है लहूलुहान, धर्म बना आतंक दिन भी है आंतहीन रात अरे इस धरती का कॊई ईश्वर अल्लाह या परमपिता है कि नहीं। इस्लाम मानी शांति इंसानॊं का माँस खा रहा, ईसाईयत नही प्रेम, माणवता का खून पा रहा,, इनके युद्ध ने दिया ज़मीं कॊ लाशॊं से पाट, अरे इस मरती का कॊई ईश्वर अल्लाह या परमपिता है कि नहीं। हिंदू कहता गुरू सारे देवॊं देवियॊं से आला है, आज इसके हाथ हाथ गुरू के लिए ही भाला है, सब तरफ़ से कर रहे गुरुदेवॊं पे घात पर घात, अरे इस जगती का कॊई ईश्वर अल्लाह या परमात्मा है कि नहीं। अगर है तॊ बेकार है, नहीं है तॊ नहीं ही है, ऐसे में हम क्या करें, सोचने की बात यही है, या हम खुद अपने देव बनें, लायें नया प्रभात! न कहें सृष्टि का कॊई ईश्वर अल्लाह या परमपिता है कि नहीं।

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बताते है कि परमपिता का कण कण में विधान है,

सुनते हैं कि परमेश्वर, परमात्मा सर्वशक्तिमान है, तॊ बूढ़े विद्वानॊं कॊ मरवाने वाला कौन महान है। कहते हैं कि खुदा अल्लाह एक सबसे बड़ा रहमान है, तॊ नवयुवक काफ़िरॊं का कत्ल करवाने कौन महान है, बताते है कि परमपिता का कण कण में विधान है, फ़िर पुराने महल, मूर्तिय तुड़वाने वाला कौन महान है। समझाते हैं कि सब धर्मॊं का बस एक ही भगवान है, फ़िर इन्हें आपस में लड़वाने वाला कौन महान है। सिखाते मंदिर मस्ज़िद गिरजे सब एक के ही सामान है, फ़िर इनकॊ जलवाने, ढहवाने वाला बोलो कौन म्हान है। पढ़ाते हिंदू, मुस्लिम, ईसाई सब एक की ही संतान हैं, फ़िर इन्हें एक दूजे से कटवाने वाला वॊ कौन महान है। इसलिए ये सव मानॊ कि ये सब के सब शैतान हैं, परमेश्वर अल्लाह खुदा भगवान कॊई नहीं महान है। धरती सबकी माता है ओ सबके पिता आसमान हैं, जॊ भी इस सच कॊ जान ले समझॊ वही महान है।

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नास्तिकॊं कॊ जॊ मरवाये, उस अल्लाह कॊ हम क्या कहें

नास्तिकॊं कॊ जॊ मरवाये, उस अल्लाह कॊ हम क्या कहें,काफ़िरॊं की हत्या करवाये उस भगवान कॊ हम क्या कहें। औरतॊं संग बलात्कार कॊ भी बिल्कुल सही ठहराते धरम,बच्चॊं संग हर अनाचार कॊ एकदम ठीक कहते हरम,शैतानॊं के गुलाम बने इस नये इंसान को हम क्या कहें,नास्तिकॊं कॊ जॊ मरवाये, उस लल्लाह कॊ हम क्या कहें,काफ़िरॊं की हत्या करवाये उस भगवान कॊ हम क्या कहें। अपने संग अपने सधार्मिकॊं कॊ मारना जॊ सिखलाये,दूसरे धर्मॊं के पुराने थानॊं कॊ तॊड़ने की राह दिखाये,वैसे कुरआन, वैसी बाईबिल, वैसे पुराण को क्या कहें,नास्तिकॊं कॊ जॊ मरवाये, उस लल्लाह कॊ हम क्या कहें,काफ़िरॊं की हत्या करवाये उस भगवान कॊ हम क्या कहें। जिस पथ में बुज़ुर्ग विद्वानॊं की हत्या भी रायज हॊ,जिस दीन में नौजवान लेखक का कत्ल तक जायज हो,उसके मठ, उसके मस्ज़िद, उसके बथान को हम क्या कहें,नास्तिकॊं कॊ जॊ मरवाये, उस लल्लाह कॊ हम क्या कहें,काफ़िरॊं की हत्या करवाये उस भगवान कॊ हम क्या कहें। जिसमें इतिहास कॊ जानना और मानना भी एक पाप हो,जिसमें भविष्य कि फ़िकर करना भी एक अपराध हो,ऐसे धार्मिक अकीदे, ऐसे दीनी ज्ञान कॊ हम क्या कहें,नास्तिकॊं कॊ जॊ मरवाये, उस लल्लाह कॊ हम क्या कहें,काफ़िरॊं की हत्या करवाये उस भगवान कॊ हम क्या कहें।

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