मुख्य पन्ना / 2016 (पन्ना 3)

वार्षिक आर्काइव: 2016

इतने सारे ऊपर वाले, फ़िरभी दुखी क्यूँ इंसान

ईश्वर अल्लाह परमपिता खुदा रहीम राम रहमान, इतने सारे ऊपर वाले, फ़िरभी दुखी क्यूँ इंसान। कभी जच्चा, कभी बच्चा, कभी दोनॊं मरते बेचारे, किसके भरॊसे इनकॊं छॊड़ा उन्हॊंने, इन कॊ बेसहारे, क्या इनकी खातिर नहीं है, एक भी दिव्य विधान। ईश्वर अल्लाह परमपिता खुदा रहीम राम रहमान, इतने सारे ऊपर वाले, फ़िर भी दुखी क्यूँ इंसान। बाल मज़दुर, बाल वेश्या से भरा पड़ा है संसार, किसके सहारे छॊड़ा उन्हॊंने इनकॊ स्वरूप उपहार, क्या उनकी खातिर नहीम है कॊई नियम, प्रमाण, ईश्वर अल्लाह परमपिता खुदा रहीम राम रहमान, इतने सारे ऊपर वाले, फ़िर भी दुखी क्यूँ इंसान। सही मज़दूरी मिलती नहीं कॊई करें कितना भी काम, किसके लिए कर रखा है उन्हॊंने इनका जीना हराम, क्यॊं नहीं है के लिए कॊई औतारी, पयंबरी आह्वान, ईश्वर अल्लाह परमपिता खुदा रहीम राम रहमान, इतने सारे ऊपर वाले, फ़िर भी दुखी क्यूँ इंसान।

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इस देश का कॊइ मंतरी या प्रधान है कि नहीं

कॊई कानून से ऊपर तॊ कॊई कानून से बाहर है, अरे, इस देश का कॊइ मंतरी या प्रधान है कि नहीं। कहीं हत अखलाक तॊ कहीं बलात्कृत ज्यॊति है, माँ भारती सिसक सिसक कर दिन रात रोती है, आज कवि सवाल पूछता सिर झुकाये सादर है, अरे, इस देश का कॊई पति या प्रधान है कि नहीं। कहीं कलबुर्गी मरे हैं तॊ कहीं पनसारे पड़ॆ है, इनके हत्यारे सीना ताने हर चौराहे पर खड़ॆ है, सो शायर ये सवाल पूछता विनय में आकर है, इस देश का कॊई पति या प्रधान है कि नहीं। दाभोलकर की हत्या कहीं रोहित की आत्महत्या है, और इनके संघाती कर रहे सत्य तॊ अब मिथ्या है, इसलिए गीतकार पूछ रहा ये सब रो-गा कर है, इस देश का कॊई पति या प्रधान है कि नहीं।

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